प्रिय Eunice, अपने गाँव के शहद की कहानी और सुनाओ
Didi अफ्रीका के तंज़ानिया में रहने वाली अपनी हमउम्र दोस्त Eunice से चिट्ठियाँ साझा करती है।
Eunice के गाँव के फूलों की क्यारियाँ, पापा की मधुमक्खियों की बातें, और इन दिनों बारिश न होने की चिंता तक।
दूर रहकर भी चिट्ठी से मन बाँटने पर हम एक-दूसरे की ताक़त कैसे बनते हैं — साथ में पढ़ें।
प्रिय Eunice — पहली चिट्ठी भेज रही हूँ

प्रिय Eunice,
नमस्ते, मैं Didi हूँ, कोरिया में रहती हूँ।
WAGZAK JUMP पर तुम्हारे गाँव की तस्वीरें देखीं — फूल इतने सारे थे कि मैं देर तक उन्हें निहारती रही।
दादी के बनाए शहद-पाव खाते हुए अचानक मन हुआ कि तुम्हें चिट्ठी लिखूँ।
तुम्हारा दिन कैसा बीतता है? तुम्हें क्या-क्या पसंद है?
दूर के दोस्त को चिट्ठी लिखना मेरे लिए पहली बार है — दिल थोड़ा-थोड़ा धड़क रहा है।
प्रिय Didi — अपने Shuli गाँव में तुम्हें बुला रही हूँ

प्रिय Didi,
अरे वाह, चिट्ठी! इतनी ख़ुशी हुई कि मैं उछल पड़ी।
मैं Eunice हूँ। आठ साल की। अफ्रीका के तंज़ानिया में Shuli गाँव में रहती हूँ।
हमारे गाँव में फूल और पेड़ बहुत सारे हैं।
यहाँ इंसान भी और मधुमक्खियाँ भी — दोनों आराम से रहते हैं। मैं हमेशा गर्व से यही बताती हूँ।
सुनकर कि तुमने तस्वीर देर तक देखी, मेरे कंधे ज़रा सीधे हो गए। कभी सच में हमारे गाँव घूमने आ जाना!
प्रिय Eunice — वो लकड़ी का डिब्बा क्या है?

Eunice, तस्वीर में मैंने पेड़ पर लटका एक डिब्बा देखा।
वो क्या है? चिड़ियों का घर है क्या? देर तक यही सोचती रही।
और शहद! मुझे तो शहद-पाव बेहद पसंद है।
तुम्हारे पापा ख़ुद शहद इकट्ठा करते हैं — सुनकर मेरे पापा भी चौंक गए।
वो शहद कैसा होता है? दादी के शहद-पाव से भी मीठा?
प्रिय Didi — पापा और मधुमक्खियों की कहानी

प्रिय Didi,
सही पहचाना! वो मधुमक्खियों का छत्ता है। पापा ने शहद इकट्ठा करने के लिए पेड़ पर लगाया है।
मक्खियाँ फूलों पर आती-जाती रहती हैं, और डिब्बे के अंदर मीठा शहद धीरे-धीरे जमा होता जाता है।
उस शहद को बाज़ार में बेचने से हमारे घर की आमदनी में बड़ा सहारा मिलता है।
इसीलिए हमारे लिए मधुमक्खियाँ सिर्फ़ कीड़े नहीं — परिवार जैसी अनमोल हैं।
स्वाद? हम्म… ऐसा लगता है जैसे धूप की महक है! तुम्हारी दादी के शहद-पाव से किसका जीत होगी, मुझे भी जानने की उत्सुकता है।
प्रिय Didi — इन दिनों बारिश नहीं हो रही

प्रिय Didi, आज ज़रा सच्ची बात साझा करूँगी।
आजकल हमारा गाँव बहुत गर्म है। और बारिश को बहुत दिन हो गए।
फूल पहले जैसे खिल नहीं पाते, इसलिए मक्खियाँ एक-एक करके दूसरी जगह चली जाती हैं।
पापा बार-बार आसमान की ओर देखते रहते हैं।
बारिश न हो तो खेती मुश्किल हो जाती है, और पीने के पानी की कमी भी होने लगती है।
फिर भी मुझे अपना गाँव बहुत प्यारा है। बस… एक बार और बारिश आ जाए, यही मन है।
प्रिय Eunice — मैंने भी साथ में पता किया

Eunice की चिट्ठी पढ़कर मैं चुप नहीं बैठ सकी।
बारिश क्यों नहीं हो रही — किताबें और वीडियो देर तक खंगालती रही।
हम जब आराम से जीते हैं, तब कारख़ानों और गाड़ियों से एक अनदेखा धुआँ धीरे-धीरे निकलता रहता है।
वो आसमान में जमा होकर पृथ्वी को धीरे-धीरे गर्म कर देता है, और कुछ जगहों पर बारिश कम होने लगती है।
तंज़ानिया हो या कोरिया — हम सब एक ही पृथ्वी पर हैं।
तो यह सिर्फ़ तुम्हारे गाँव की बात नहीं, हम सब की बात है।
प्रिय Eunice — आओ मिलकर चिट्ठियाँ जुटाएँ

Eunice, मैंने एक ख़ास बात जानी।
दुनिया भर में ऐसे दोस्त हैं जो तुम्हारे गाँव के साथ खड़े होना चाहते हैं।
उन सबकी भावनाएँ चिट्ठियों में इकट्ठी होती हैं, तो गाँव में कुआँ खोदा जा सकता है, और साफ़ पानी पहुँच सकता है।
पापा को नया काम ढूँढने में मदद मिले, और तुम भी मन से स्कूल जा सको।
अकेले मेरी एक चिट्ठी से कल ही बारिश नहीं बुलाई जा सकती।
लेकिन तुम और मैं, और दूसरे दोस्त भी मिलकर मन इकट्ठा करें, तो कहानी बदल जाती है।
"मैं तुम्हारी मदद करूँगी" से अच्छा है "चलो साथ में करते हैं"!
प्रिय Didi — हम दोनों से शुरुआत करते हैं

प्रिय Didi,
तुम्हारी चिट्ठी पढ़ते हुए मेरी नाक की नोक झनझना गई। अच्छा वाला झनझनाहट है, समझीं?
तुमने हमारे गाँव की चिंता बाँट ली — बस इतने से ही मन हल्का हो गया।
हाँ, हम दोनों पहले शुरू करते हैं। और बाकी दोस्तों से भी कहते हैं कि साथ में लिखें।
तुम कोरिया की कहानी सुनाना, मैं Shuli गाँव की कहानी सुनाऊँगी।
हम, चिट्ठियों से लगातार जुड़े रहें!
प्रिय Eunice — फिर लिखूँगी

Eunice, जवाब के लिए शुक्रिया। मैंने पढ़ा, और फिर-फिर पढ़ा।
आज से मैं एक छोटा-सा वादा शुरू करने जा रही हूँ।
जो लाइट नहीं इस्तेमाल हो रही, उसे बंद कर दूँगी; और पानी पीते समय काग़ज़ के कप की जगह अपनी बोतल लूँगी।
एक बार इस्तेमाल होने वाली चीज़ें थोड़ी कम करें तो पृथ्वी थोड़ी और सहज साँस लेती है।
ये छोटी-छोटी आदतें जमा होती जाएँ तो कभी न कभी तुम्हारे गाँव के आसमान में भी ठंडी बारिश लाने में योगदान बन सकती है — यही विश्वास है।
अगली चिट्ठी में अपनी दादी की शहद-पाव की रेसिपी लिखकर भेजूँगी। तुम्हारे गाँव के शहद से एक बार बनाकर देखना!
दूर रहकर भी हम एक ही पृथ्वी के दोस्त हैं, इसीलिए मैं अक्सर चिट्ठियाँ लिखूँगी।
प्रिय Eunice, फिर लिखूँगी। ख़ुश रहो! हो-हो।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. क्या जलवायु परिवर्तन का सच में मधुमक्खियों से कोई रिश्ता है?
पृथ्वी जैसे-जैसे गर्म होती है, सूखे लंबे होते जाते हैं, और तब फूल पहले जैसे खिल नहीं पाते। मधुमक्खियाँ फूलों से शहद जुटाती हैं, इसलिए फूल कम होने पर उनका जीना भी मुश्किल हो जाता है। प्रकृति इस तरह आपस में जुड़ी हुई है। हाँ, मौसम और प्रकृति में कई बातें मिलकर असर डालती हैं, इसलिए "एक काम से सीधे एक नतीजा" मानने के बजाय बड़ी तस्वीर को साथ में समझना ज़रूरी है।
Q. दूर रहने वाले दोस्त के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं?
'सहायता' को 'बेचारे की एकतरफ़ा देखभाल' मानने की ज़रूरत नहीं। एक-दूसरे की कहानियाँ बाँटना और मिलकर मन जुटाना — यही असली ताक़त है। कई लोगों की भेजी हुई गर्म चिट्ठियाँ और ध्यान जब जुड़ते हैं, तो गाँव में कुआँ खुदना या बच्चों के स्कूल जाने की राह खुलना — ऐसे असली बदलाव हो सकते हैं। असली बात है — "मैं तुम्हारी मदद करूँगी" के बजाय "हम साथ में करते हैं" वाला बराबरी का मन।
Q. घर पर बच्चे के साथ मिलकर क्या किया जा सकता है?
जो लाइट नहीं इस्तेमाल हो रही उसे बंद करना, काग़ज़ के कप की जगह अपनी बोतल रखना — ऐसी छोटी ऊर्जा बचत की आदतें साथ में बनाएँ। और किसी दूसरे देश के या अपने ही मोहल्ले के किसी कठिनाई में रहे दोस्त को मन वाली चिट्ठी लिखने की गतिविधि भी अच्छी है। दूर रहने वाले दोस्त की रोज़मर्रा और संस्कृति में दिलचस्पी रखना और सम्मान करना — साथ में बात करते हुए बच्चा दुनिया को बड़े और गर्म नज़रिए से देखने लगता है। सबसे ज़रूरी है — "साथ में" वाला मन।
अगली बार फिर मज़ेदार लेसन लेकर आऊँगी। — Didi
