ज़मीन तो समतल है, फिर धरती को गोल क्यों कहते हैं

💡 यह कहानी है —
Purum बार-बार बस ज़मीन की ओर देखते हुए चल रहा है। "ज़मीन तो समतल है, फिर इसे गोल क्यों कहते हैं?"
Didi और Purum जासूस की तरह एक-एक करके सबूत ढूँढते हैं, और यह राज़ खोलते हैं कि धरती गोल है और घूम भी रही है।
दिन और रात, और हर मौसम में तारे क्यों बदल जाते हैं — यह सब हम साथ मिलकर जानेंगे।

Purum सिर्फ़ ज़मीन देखकर क्यों चलता है

एकटक ज़मीन देखते हुए चलते-चलते Popo की पीठ से टकराता Purum और देखती हुई Didi

"अजीब है… सच में बहुत अजीब है…"

Purum काफ़ी देर से बस ज़मीन को एकटक देखते हुए चल रहा था, और तभी धम्म से Popo की पीठ से टकरा गया।

जब मैंने पूछा कि क्या कोई चिंता है, तो Purum ने मुँह फुला लिया।

"Didi कहती हैं कि धरती गोल है… पर मैं जितना भी देखूँ, ज़मीन तो समतल ही दिखती है। और हिलती भी नहीं!"

सुनकर तो ऐसा ही लगता है न? मुझे भी यह यकीन नहीं होता कि जिस ज़मीन पर मैं रोज़ चलती हूँ, वह एक गोल गेंद है।

Saerom, जिसने इंटरनेट पर खोजा था, वह भी "वो… वो तो…" कहते-कहते अटक गई और फिर चिल्ला उठी। "Popo, हमें बताओ!"


सबूत ढूँढने, आसमान के ऊपर

Popoka अंतरिक्ष यान में बैठकर आसमान के ऊपर जाते Didi और उसके दोस्त

Popo मुस्कुराया। "सौ बार बताने पर भी यकीन नहीं होता न? तो चलो खुद ही सबूत ढूँढने चलते हैं।"

"आ जा, Popoka!" एक अंतरिक्ष यान सर्र से प्रकट हुआ, और हम आसमान के ऊपर चढ़ गए।

ज़मीन गोल है — इसे अपनी आँखों से देखकर पक्का करने वाला जासूसी खेल अब शुरू।


सबूत एक — जहाज़ का ऊपरी हिस्सा पहले दिखता है

क्षितिज के उस पार से मस्तूल के ऊपरी हिस्से से उभरकर आते जहाज़ को देखते Didi और Purum

दूर समुद्र में से एक जहाज़ आ रहा है।

पर अजीब है न? पूरा जहाज़ एक साथ नहीं दिखता, बल्कि ऊपरी हिस्सा (मस्तूल) पहले धीरे-धीरे ऊपर उभरकर आता है।

"जहाज़ तो तल से उभरकर नहीं आ रहा, फिर ऊपरी हिस्सा पहले क्यों दिखता है?" Purum आँखें सिकोड़कर गहरी सोच में डूब गया।

अगर ज़मीन समतल होती, तो जहाज़ पूरा का पूरा छोटा दिखकर फिर बड़ा होते जाना चाहिए था न।

ऊपरी हिस्सा पहले दिखने का मतलब है कि समुद्र गेंद की तरह उभरा हुआ, घुमावदार है। यह एक सुराग है। ओह, एक सबूत मिल गया!


सबूत दो — ध्रुवतारे की ऊँचाई हर इलाके में अलग होती है

हमेशा उत्तर में चमकते ध्रुवतारे की ओर इशारा करता Popo और ऊपर देखते बच्चे

Popo ने रात के आसमान की ओर इशारा किया। "ध्रुवतारा चारों मौसम हमेशा उत्तर में ही रहता है। पर हर इलाके में उसकी ऊँचाई अलग-अलग दिखती है।"

"अरे? अगर ज़मीन समतल होती, तो कहीं से भी देखो, एक जैसा ही दिखना चाहिए न?" Purum ने पहले ही ताड़ लिया। सही कहा, अलग दिखना ही तो एक और सुराग है।


सबूत तीन — उपग्रह की तस्वीर सीधी-सीधी!

कृत्रिम उपग्रह द्वारा अंतरिक्ष से ली गई गोल धरती की तस्वीर देखकर चकित Didi और Purum

और फिर पक्का सबूत। और ऊपर चढ़े तो—

वाह, धरती गोल दिख रही है!

कृत्रिम उपग्रह ने अंतरिक्ष से जो तस्वीर ली, उसमें धरती कोई भी देखे तो एक नीली गेंद ही लगती है।

पहले तो बस अंदाज़ा लगाते थे, पर अब तो तस्वीर ही है न। Purum ने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए। "सच में गोल है!"

बगल में Saerom इतरा उठी। "देखा, मैंने जो खोजा था, वो सही था न?"


पर यह घूमती है? दिन और रात का राज़

अकेले घूमती हुई धरती, जहाँ धूप पड़ती है वहाँ दिन और जहाँ नहीं पड़ती वहाँ रात — AR

गोल होना तो समझ आ गया, पर Purum के कहे अनुसार क्या यह सच में घूमती भी है?

Popo ने धरती को हल्के से छुआ, तो धरती लट्टू की तरह अकेले ही गोल-गोल घूमने लगी।

इसे ही 'अपनी धुरी पर घूमना' (परिभ्रमण) कहते हैं।

जिस ओर धूप पड़ती है वहाँ दिन, और जिस ओर पीठ करके धूप नहीं पड़ती वहाँ रात

"आहा, धरती घूमती है इसीलिए कभी दिन तो कभी रात होती है!" Purum ने घुटने पर ताल ठोकी। अभी ज़मीन ताकने वाले Purum से अब वह बिल्कुल बदल गया था।


हर मौसम में तारे बदलने की वजह

सूरज के चारों ओर एक चक्कर लगाती धरती और हर मौसम में बदलते तारामंडल — AR

और धरती सिर्फ़ अपनी जगह घूमती ही नहीं रहती।

एक बड़े रास्ते पर चलते हुए साल में एक बार सूरज के चारों ओर एक चक्कर — गोल-गोल लगाती है। इसे 'सूरज के गिर्द परिक्रमा' (परिक्रमण) कहते हैं।

इसीलिए हर मौसम में दिखने वाले तारामंडल बदल जाते हैं।

गर्मियों में मिलने वाले तारे और सर्दियों में मिलने वाले तारे अलग-अलग दोस्त हैं!

"तो धरती पूरे साल एक ही जगह चुपचाप टिकी नहीं रहती।" अब Purum के चेहरे पर पूरी तरह समझ आ जाने का भाव था।


घर पर खुद आज़माकर देखें

अँधेरे कमरे में टॉर्च और गेंद से दिन-रात का प्रयोग करते Didi और Bobo

Bobo ने उत्साह से सुझाव दिया। "अँधेरे कमरे में टॉर्च और गेंद से करके देखते हैं!"

गेंद को धीरे-धीरे घुमाओ, तो जिस ओर रोशनी पड़ती है वहाँ दिन, जिस ओर नहीं पड़ती वहाँ रात। जो परिभ्रमण हमने देखा था, वह आँखों के सामने हाज़िर!

Ppuri ग्लोब को गोल-गोल घुमाता है। "अभी मेरे यहाँ दिन है, पर धरती के दूसरी ओर वाला दोस्त तो मज़े से सो रहा होगा न?"

मैंने एक बात और जोड़ी। साफ़ रात में, परिवार के साथ तारे निहारना।

धरती मेहनत से सफ़र करती रहती है, इसीलिए हम गर्मियों के तारा-दोस्त और सर्दियों के तारा-दोस्त से बारी-बारी मिल पाते हैं।


समतल दिखे फिर भी, हम एक गोल ग्रह पर हैं

ज़मीन पर खड़े होकर गोल धरती और आसमान को नई नज़र से देखते Didi और Purum

फिर से ज़मीन पर उतरकर मैंने पैर ठक-ठक करके पटके।

अब भी समतल ही दिखती है, और ऐसा लगता है मानो स्थिर खड़ी हो।

पर अब मैं जानती हूँ। हम गोल-गोल घूमते हुए सूरज के चारों ओर सफ़र करते एक गोल ग्रह पर खड़े हैं।

Purum, सिर्फ़ ज़मीन मत देखो, कभी-कभी आसमान भी ऊपर उठकर देख लिया करो। हमारा यह ग्रह अभी भी सफ़र पर है न।

आज रात कौन-सा तारा-दोस्त बाहर निकला होगा? हो हो।


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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्र. हमें कैसे पता चलता है कि धरती गोल है?

दूर से जहाज़ आते समय पूरा जहाज़ नहीं, बल्कि उसका ऊपरी हिस्सा (मस्तूल) पहले दिखना, और हर इलाके में ध्रुवतारे की ऊँचाई अलग-अलग दिखना — ये गोल होने के सुराग हैं। सबसे बढ़कर, कृत्रिम उपग्रह द्वारा अंतरिक्ष से ली गई तस्वीर देखें तो पक्के तौर पर पता चल जाता है कि धरती एक नीली गेंद की तरह गोल है।

प्र. दिन और रात क्यों होते हैं?

धरती लट्टू की तरह अकेले गोल-गोल घूमती है, इसे 'अपनी धुरी पर घूमना' (परिभ्रमण) कहते हैं। घूमते हुए जिस ओर धूप पड़ती है वहाँ दिन, और जिस ओर पीठ करके धूप नहीं पड़ती वहाँ रात हो जाती है। इसीलिए एक दिन के भीतर दिन और रात बारी-बारी से आते हैं।

प्र. हर मौसम में दिखने वाले तारामंडल अलग क्यों होते हैं?

धरती साल में एक बार सूरज के चारों ओर एक चक्कर लगाती है, इसे 'सूरज के गिर्द परिक्रमा' (परिक्रमण) कहते हैं। परिक्रमा करते हुए धरती की स्थिति लगातार बदलती रहती है, इसलिए हर मौसम में रात के आसमान में दिखने वाले तारामंडल बदल जाते हैं। इसीलिए गर्मियों और सर्दियों में मिलने वाले तारे एक-दूसरे से अलग होते हैं।


अगली बार फिर एक और मज़ेदार लेसन की कहानी लेकर आऊँगी। — Didi की ओर से।

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